।।०१।। घायल मानवता भयी, चोट करे सरकार। पुलिस कहर बरपा रही, दमन करे हर बार।। दमन करे हर बार, लट्ठ से जमकर कूटे। मंत्री बेईमान, करें नित वादे झूंठे।। कहि सुरेश कविराय, किया बच्चों ने क़ायल। लोकतंत्र की लाज, रखी होकर के घायल।। ।।०२।। गाली भद्दी भी मिली, घोर हुआ अपमान। इस्तीफा देना पड़ा, उतर गए परिधान।। उतर गए परिधान, काम कीने थे गंदे। शिक्षा में सरकार, करे नित गोरख धंधे।। कहि सुरेश कविराय, कि नीयत इनकी काली। दुर्बल की पहिचान, दूर से देता गाली।। सुरेश कविराय #सुरेशकविराय #छंद #कुण्डलियाँ
सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।