सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संपर्क' (Contact)

 


📞 संपर्क सूत्र (Contact Us)

"शब्दों के माध्यम से जुड़ने का यह आत्मीय आमंत्रण है..."
साहित्य अनुरागी पाठकों, प्रकाशकों, कवि सम्मेलन आयोजकों और मित्रों, यदि आप किसी साहित्यिक आयोजन, काव्य-पाठ, पुस्तक चर्चा, या कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान के संबंध में संपर्क करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए आधिकारिक माध्यमों से जुड़ सकते हैं।


📩 आधिकारिक संपर्क माध्यम (Direct Contact)
  • 📧 ईमेल (Email):

email: shayersureshchandra@gmail.com

🌐 डिजिटल जुड़ाव एवं सोशल मीडिया (Social Media Links)

 🔵 फेसबुक प्रोफाइल (Facebook): यहाँ क्लिक करके फेसबुक पर जुड़ें

facebook link:

https://www.facebook.com/share/1LfjjYiNtz/

📸 इन्स्टाग्राम (Instagram): यहाँ क्लिक करके इंस्टाग्राम पर जुड़ें

instagram link:

https://www.instagram.com/prajapati9922?stkn=aWptaHRocDFnczMx

📍 मुख्य केंद्र (Location): कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान, दिल्ली

kalamkar kumbh link:

https://www.facebook.com/share/g/19jUxfPfQo/

जुड़ें🔴 यूट्यूब चैनल (YouTube): यहाँ क्लिक करके काव्य प्रस्तुतियाँ देखें

Youtube link:

https://youtube.com/@milestone3424?si=aiB44z58Ub0jBkIS

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

न कोई याद आता है सुरेश कविराय के मुक्तक

  नहीं दिल में रहा कोई, न कोई याद आता है। मगर इक दर्द है दिल में, वही हर पल सताता है। दिमागी हाल अच्छा है, मगर वो ख़्वाब सच्चा है। बसा जो रूह के अंदर, पता अंतस बताता है।। सुरेश कविराय #सुरेशकविराय #हिंदी #मुक्तक

आज विषैली हो गई

 "राजनीतिक संवादों में जब मर्यादा और तर्क की जगह अंधभक्ति और हिंसा ले ले, तो समाज का ताना-बाना बिखरने लगता है। जहाँ रक्षक ही भक्षक बनकर आस्था और विश्वास को लूटने लगें, वहाँ न्याय की बुनियादी हवा भी ज़हरीली महसूस होने लगती है। आइए, इसी कड़वे सच से साक्षात्कार कराती यह रचना सुनें..." आज विषैली हो गयी, राजनीति की बात,  अंधभक्त हाबी हुये, चलते घूँसा लात।  चलते घूँसा लात, झूँठ को साँच बताते,  कहते चौकीदार, लूट मंदिर को खाते।  कहि सुरेश कविराय, अनीती इनकी शैली,  न्यायालय में गंध, फैलती आज विषैली।। #कुंडलियाँ #हिंदीसाहित्य #सुरेशकविराय

शिक्षा देती ज्ञान

  पोथी रट पंडित बने, भीतर भरा कबाड़। पाखंडों का देश में, ऊँचा खड़ा पहाड़। ऊँचा खड़ा पहाड़, तर्क से ढोंगी डरता। नफ़रत का बाज़ार, गरम पाखण्डी करता।। कहि सुरेश कविराय, छोड़ सब बातें थोथी। शिक्षा देती ज्ञान, छोड़ दे रटना पोथी।। सुरेश कविराय