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नवंबर, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बचें नहीं ग़द्दार, बात तै कर गई रैली, सुरेश की कुण्डलियाँ

  रैली महा विशाल थी, टूटे सकल रिकॉर्ड। दिल्ली का दिल थम गया, पटे भीड़ से रोड।। पटे भीड़ से रोड, गर्जना महा बली की। जायेगा ज्ञानेश, गूँज है गली गली की।। वोट चोर सरकार, खबर सब जग में फैली। बचें नहीं ग़द्दार, बात तै कर गई रैली।।

आशा करे निराश, सुरेश कविराय के दोहे

  एक अपेक्षा जब बढ़े, आप बढ़े विश्वास। दोनों पूरक आप में, आशा करे निराश।।

मति की मिले न औषधी, सुरेश कविराय के दोहे

  क्रय कर लाये ज़ख्म ख़ुद, मरहम जान विचार। मति की मिले न औषधी, लाख  करो  उपचार।।

पीड़ा भी मनभाविनी, सुरेश कविराय के दोहे

  पीड़ा भी मनभाविनी, जो  पीड़ा दे प्रेम। यादें आकुल कर रहीं, व्याकुलता दे क्षेम।।

है जी का जंजाल

  वैसे  तो  संसार  में, फैला  माया   जाल। लेकिन बंधन प्रेम का, है जी का जंजाल।।

मिले न नैना नैन से, सुरेश कविराय के दोहे

  नाम नहीं अनुराग का, नैनन  नहीं  सनेह। मिले न नैना नैन से, तनिक न दृग में नेह।।

दूर नैन से नूर, सुरेश कविराय के दोहे

  दृष्टि बहुत कमजोर है, भाव सकल मजबूर। दर्पण  में ओझल छवी,  दूर   नैन  से   नूर।।

बिलखें नैना बाबरे, सुरेश कविराय के दोहे

  बिलखें नैना बाबरे, बिलख रही है रूह। घाव बहुत गंभीर उर, बिलखे भाव समूह।।

प्रेम जगत झूठा करे, सुरेश कविराय के दोहे

  बिलख रही है भावना, रूह  बहुत अतृप्त। प्रेम जगत झूठा करे, मन फिर भी संलिप्त।।

विकल भई सरकार, सड़क पर देख तिरंगा।।

 देख तिरंगा की लहर, पस्त भई सरकार। युवा शक्ति को रोकने, करती जतन हजार।। करती जतन हजार, राष्ट्र से झूंठा नाता। शासक बहुत क्रूर, फ़ौज ऊपर चढ़बाता। कहि सुरेश कविराय, दमन की दिल्ली गंगा। विकल भई सरकार, सड़क पर देख तिरंगा।। कैसा तानाशाह है, रोक रहा है राह। थाम तिरंगा हाथ में, जनता बेपरवाह। जनता बेपरवाह, चढ़ी सत्ता की छाती। रोक रही सरकार, निरंकुश है मदमाती। कहि सुरेश कविराय, न राजा देखा ऐसा। लोकतंत्र मजबूर, राज ये आया कैसा।। #सुरेशकविराय 

जंतर मंतरछू मंतर , सुरेश कविराय की कुण्डलियाँ

  जंतर मंतर हो गया, छू मंतर तत्काल। दिल्ली के दिल में मचे, इसपर बहुत बबाल।। इसपर बहुत बबाल, करें कैसे प्रदर्शन। मिले नहीं सरकार, कहां फिर होंगे दर्शन। जगह जगह की बात, जगह में होता अंतर। डरी हुई सरकार, रोकती जंतर मंतर।। #सुरेशकविराय

दुर्बल सोच, सुरेश कविराय की कुण्डलियाँ

  रखना दुर्बल सोच मत, ये है गरल समान। जहर असर करता नहीं, जब हो सोच महान।। जब हो सोच महान, शक्ति तन मन में आए। मिले जगत सम्मान,सहज रस्ता मिल जाए। कहि सुरेश कविराय, ज्ञान की बान परखना। करना सोच विचार, सोच पर अच्छी रखना।।

सुरेश कविराय के नीतिपरक दोहे

  जहर मार सकता नहीं, अच्छी जिनकी सोच। जिनकी  छोटी  सोच  है, बने  पैर  की  मोच।। रखना  दुर्बल  सोच मत, ये  है  गरल  समान। जहर असर करता नहीं, जब हो सोच महान।। व्यक्ती बनकर जो जिये, नहीं व्यक्ति वो पूर्ण। व्यक्तित्वहि  जिंदा  रहे, व्यक्ती  होता जीर्ण ।। #सुरेशकविराय

दरबारी है मीडिया, सुरेश कविराय की कुण्डलियाँ

  दरबारी है मीडिया, खेल करे सरकार। वोट काट कर जीतती, बीजेपी हर बार। बीजेपी हर बार, सियासत गंदी करती। काटे वोट अपार, न सत्ता इससे डरती। डरा हुआ ज्ञानेश, रोष में जनता भारी। कहता खरी सुरेश, मीडिया है दरबारी ।। #सुरेशकविराय