जंतर मंतर हो गया, छू मंतर तत्काल।
दिल्ली के दिल में मचे, इसपर बहुत बबाल।।
इसपर बहुत बबाल, करें कैसे प्रदर्शन।
मिले नहीं सरकार, कहां फिर होंगे दर्शन।
जगह जगह की बात, जगह में होता अंतर।
डरी हुई सरकार, रोकती जंतर मंतर।।
#सुरेशकविराय
सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
जंतर मंतर हो गया, छू मंतर तत्काल।
दिल्ली के दिल में मचे, इसपर बहुत बबाल।।
इसपर बहुत बबाल, करें कैसे प्रदर्शन।
मिले नहीं सरकार, कहां फिर होंगे दर्शन।
जगह जगह की बात, जगह में होता अंतर।
डरी हुई सरकार, रोकती जंतर मंतर।।
#सुरेशकविराय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें