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आशा करे निराश, सुरेश कविराय के दोहे

  एक अपेक्षा जब बढ़े, आप बढ़े विश्वास। दोनों पूरक आप में, आशा करे निराश।।

मति की मिले न औषधी, सुरेश कविराय के दोहे

  क्रय कर लाये ज़ख्म ख़ुद, मरहम जान विचार। मति की मिले न औषधी, लाख  करो  उपचार।।

पीड़ा भी मनभाविनी, सुरेश कविराय के दोहे

  पीड़ा भी मनभाविनी, जो  पीड़ा दे प्रेम। यादें आकुल कर रहीं, व्याकुलता दे क्षेम।।

है जी का जंजाल

  वैसे  तो  संसार  में, फैला  माया   जाल। लेकिन बंधन प्रेम का, है जी का जंजाल।।

मिले न नैना नैन से, सुरेश कविराय के दोहे

  नाम नहीं अनुराग का, नैनन  नहीं  सनेह। मिले न नैना नैन से, तनिक न दृग में नेह।।

दूर नैन से नूर, सुरेश कविराय के दोहे

  दृष्टि बहुत कमजोर है, भाव सकल मजबूर। दर्पण  में ओझल छवी,  दूर   नैन  से   नूर।।