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मेरे बारे में (About me)


 

परिचय और काव्य-यात्रा की शुरुआत-

यों तो माँ शारदे की कृपा और लेखन का शौक स्कूली दिनों से ही मेरे भीतर अंकुरित हो चुका था, परंतु विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण जीवन के एक लंबे और महत्वपूर्ण कालखंड में यह स्वाभाविक लेखन सुप्त अवस्था में ही रहा। इस दौरान सामाजिक न्याय से प्रेरित वैचारिक गद्य और मुक्तक यदा-कदा कागज़ पर उतरते रहे।

वर्ष २०१६ में भीतर छिपी काव्यधारा पुनः बहने को आतुर हुई, जिसे चिंतन का वास्तविक समय और धरातल कोविड काल (Covid Era) के एकांत ने प्रदान किया। तब से लेकर आज तक, छंद-शास्त्र के कड़े अनुशासन और अनुबंध में बंधकर काव्य-श्रृंखला की यह मृदु गंगा अनवरत प्रवाहित हो रही है।

प्रकाशित कृतियाँ (My Books)

छंद और दोहा साधना के अंतर्गत अब तक दो मुख्य कृतियाँ आकार ले चुकी हैं:

📕 "नैन सतसई" — नयन और दृष्टि के विविध भावों को समर्पित १०० उत्कृष्ट दोहों का अनूठा संग्रह।

📘 "निरालम्भ" — गहन चिंतन और सामाजिक चेतना को समेटे १००० दोहों का एक विशाल व संग्रहणीय संकलन।

साहित्यिक अनुष्ठान एवं संस्था

मैं 'कलमकार कुम्भ साहित्य संस्थान, दिल्ली' के संस्थापक संयोजक के रूप में साहित्य की सेवा में संलग्न हूँ। इस संस्थान के तत्वावधान में देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर भव्य साहित्यिक आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है, जिनमें प्रमुख हैं ऐवाने-ग़ालिब ऑडिटोरियम (नई दिल्ली), सीरीफोर्ट ऑडिटोरियम (नई दिल्ली), उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान (लखनऊ) और ट्रू मीडिया संस्थान (गाजियाबाद)।

सम्मान और दृष्टिकोण

"सैकड़ों रचनाकारों को साहित्य सम्मान प्रदान करना और साहित्य का यह अनुष्ठान ही मेरा निजी सम्मान है।"

एक संस्था के रूप में 'कलमकार कुम्भ' के माध्यम से देश के सैकड़ों गुणी रचनाकारों को सम्मानित करना ही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि और पुरस्कार है। किसी भी अन्य व्यक्तिगत मान-पत्र या सम्मान से अधिक प्रिय मुझे माँ भारती का यह साहित्यिक अनुष्ठान लगता है, और यही मेरी वास्तविक पूंजी है।

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  नहीं दिल में रहा कोई, न कोई याद आता है। मगर इक दर्द है दिल में, वही हर पल सताता है। दिमागी हाल अच्छा है, मगर वो ख़्वाब सच्चा है। बसा जो रूह के अंदर, पता अंतस बताता है।। सुरेश कविराय #सुरेशकविराय #हिंदी #मुक्तक

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