दरबारी है मीडिया, खेल करे सरकार।
वोट काट कर जीतती, बीजेपी हर बार।
बीजेपी हर बार, सियासत गंदी करती।
काटे वोट अपार, न सत्ता इससे डरती।
डरा हुआ ज्ञानेश, रोष में जनता भारी।
कहता खरी सुरेश, मीडिया है दरबारी।।
#सुरेशकविराय
सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
दरबारी है मीडिया, खेल करे सरकार।
वोट काट कर जीतती, बीजेपी हर बार।
बीजेपी हर बार, सियासत गंदी करती।
काटे वोट अपार, न सत्ता इससे डरती।
डरा हुआ ज्ञानेश, रोष में जनता भारी।
कहता खरी सुरेश, मीडिया है दरबारी।।
#सुरेशकविराय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें