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सुरेश कविराय के बेहतरीन दोहे "गरिमा"

1. गरिमा का मूल संदेश (The Core Message)

गरिमा भी इंसान की, खूबी एक विशेष।
गौरव है सम्मान है, गरिमा का संदेश।।

2. गरिमा का तेज और व्यापकता (The Radiance of Dignity)

गरिमा शोभा शान है, गरिमा सूर्य प्रकाश।
मानवता के मूल में, गरिमा करे निवास।।

3. गरिमा और प्रेम का संबंध (The Source of Love and Respect)

गरिमा साधन प्रेम का, गरिमा ही सम्मान।
गरिमा की महिमा अमित, गरिमा को पहचान।।

4. गरिमा का पावन रूप (The Pure and Modest Character)

गरिमा निर्मल नीर है, शीतल करे जहान।
गरिमा शील सनेह है, गरिमा लेख विधान।।

5. गरिमा की सार्वभौमिकता (The Universal Right)

गरिमा तो हर जीव का, जन्मसिद्ध अधिकार।
जाति, धर्म और लिंग का, मिटता आप विकार।।

6. गरिमा और सामाजिक सौहार्द (The Shield against Hatred)

गरिमा से संसार में, पनपे नहि विद्वेष।
गरिमा यदि जाती रही, नहीं बचे कुछ शेष।।

7. गरिमा और कर्तव्य बोध (The Alertness of Conscience)

गरिमा का यह भाव ही, करता रहे सचेत।
कर्तव्य निभे सब प्यार से, गरिमा का संकेत।।

8. गरिमा और जीवन का परम लक्ष्य (The Ultimate Welfare)

गरिमा मानव के लिए, बनी हुई वरदान।
बिन गरिमा के जीव का, कैसे हो कल्यान।।

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