तितलियाँ उड़तीं चमन में, बाग की पहिचान है।
खुश बहारें बाग में, गुल बाग का वरदान है।।
महकता गुल बाग में, देता सदा संदेश ये।
जिंदगी गुलशन बने, ये जिंदगी मेहमान है।।
प्रेम की सरिता दिवानी, जा मिली है क्षीर में।
रो रहे साहिल खड़े, मृदु नीर का नुकसान है।।
आतमा इसकी बहर पर, जिंदगी अरकान हैं।
नाम बेशक है गज़ल पर, छंद की संतान है।।
है गज़ल की धार पावन मौशिकी है रूह की।
बद्र की सी रात शीतल आदमी अंजान है।
नैन पैमाने बने, साकी बनी है दिलरुबा।
मय अधर मसरूर है पर मयकदा हैरान है।।
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