।। सम्मान और अपमान ।।
आगे आगे सम्मान है, पीछे है गुणगान।
फिर भी इनके बीच में, घुस आया अपमान।।
घुस आया अपमान, पड़ा दोनों पर भारी।
रूठ गया सम्मान, मान की होती ख्वारी।।
कहि सुरेश कविराय, मान के खुलते धागे।
झेल सके अपमान, वही नर सबसे आगे।।
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