पदानुक्रम
मूल्यवान हर जीव है, समझो इसका मोल।
पाँच अवस्था जीव की, हिये तराजू तोल।।
भूख प्यास निज आसरा, जीवन का है मूल।
दूजा सुख संभावना, जीवन के अनुकूल।।
प्रेम राग अनुराग की, मिले तीसरी खेप।
पावे सुख परिवार का, निज जीवन संक्षेप।।
जीवन की पहिचान को, महनत ही वरदान।
खपा दिया तन आपना, जग पाया सम्मान।।
खाया पीया चल दिये, ये छोटी है बुद्धि।
लौटाने को जो चले, वे नर आत्म सिध्दि।।
शिखर चेतना जीव की, कर्म सकल प्रतिबोध।
आत्मबोध अमोल है, कुल जीवन का शोध।।
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