१. प्रकोप
दहक रहा सूरज बहुत, अग्नी जैसी धूप।
बादल नभ दीखें नहीं, नीर नहीं नलकूप।।
२. चुनौती
अनिल अनल सी लग रही, गर्मी महा प्रचंड।
मही मेघ से कह रही, तोड़ो आन घमण्ड।।
३. संकट
सर सरिता सब सुखतीं, गर्मी है विकराल।
बोतल में पानी बिके, ये भी बड़ा सवाल।।
४. चेतावनी
ताप मान भू पर बढ़ा, खतरा एक प्रकार।
तपती वसुधा कह रही, सुनलो करुण पुकार।।
५. समाधान
पेड़ लगाओ भूमि पर, मत कर तनिक अबेर।
तापमान काबू रहे, मत मुख अपना फेर।।
#सुरेशचंद्रा #सुरेशकविराय #छन्दहिंदी #दोहा
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें