शैल-शिखर-नभ-पवन-प्रदाइन
पालक भूमि विधाता
हिमगिरि विंध्य अरावलि पर्वत
सिन्धु नर्मदा गंग:
जल नीलांबर मरुथल सुंदर
उज्ज्वल नव निधि रंग:
सत शुचि जगत निहारे, सब ऋतु चक्र पुकारे
धानी चोला गाता।
सकल सृष्टि जग मंगलदायक
पालक भूमि विधाता।
शुचि दे शुचि दे शुचि दे
शुचि शुभ सुख गति दे।।
कानन-कुंज-घने अति सुंदर
भू को स्वर्ग बनाता
मधुकर गुंजन खग-कुल कलरव
गान मनोहर गूंजे
सर सरिताएँ स्रोत नीर की
सलिल कमल दल फूले
मोहित सुर नर सारे, शोभा जगत निहारे
प्रकृति जगत की माता
सकल सृष्टि जग मंगलदायक
पालक भूमि विधाता
शुचि दे शुचि दे शुचि दे
शुचि शुभ सुख गति दे।।
#सुरेशकविराय #सुरेशचंद्रा #प्रकृतिगान
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें