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सुरेश कविराय का क्रांतिकारी गीत "नव सृजन होने वाला है"

सृजन की हुंकार

कर कलम उठा ले कलमकार,
नव रिक्त पृष्ठ बहु भरने को।
मशि कागज का अंत न लिखना,
अवसान मिला है लिखने को।

मेघांत नहीं है वज्रपात,
नव सृजन होने वाला है।
ख़िज़ाँ गयी नव कली खिलेगी,
नव गुंजन होने वाला है।
अंत बसंत महक उपवन की,
अलि गान मिला है लिखने को।
मशि कागज का अंत न लिखना,
अवसान मिला है लिखने को।

अंधकार में भार नहीं है,
केवल सूर्य प्रकाश नहीं है।
काली रात उसी को कहते,
जिस पल चन्द्र प्रकाश नहीं है।
सूर्य किरण हर तम हर लेती,
गुणगान मिला है लिखने को।
मशि कागज का अंत न लिखना,
अवसान मिला है लिखने को।

क्षितिज दूर नभ पास हमारे,
सिंधु नहीं गागर में रहता।
न्यायालय क्यों मौन हुए है?
मौन नहीं सागर रह सकता।
कलमकार की कलम अस्त्र है,
सम्मान मिला है लिखने को।
मशि-कागज का अंत न लिखना,
अवसान मिला है लिखने को।

कर कलम उठा ले कलमकार,
नव रिक्त पृष्ठ बहु भरने को।

#सुरेशकविराय #सुरेशचंद्रा #हिंदी #गीत

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