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"करुणा-बोध" सुरेश कविराय की दोहावली

॥ करुणा-बोध ॥

दया अहम का मूल है, करुणा सम व्यवहार।
दया उच्च का भाव है, करुणा सत्य विचार ॥

करुणा का इंसान की, गति पर पड़े प्रभाव।
दया श्रेय की भावना, करुणा सरल स्वभाव ॥

दया आम व्यवहार में, देखी जाती रोज।
करुणा सम संवेदना, जैसे फूल सरोज ॥

ऊँच नीच का भाव कुछ, दया करत आ जाय।
पर करुणा के भाव से, ऊँच नीच बिगलाय ॥

दया भाव इंसान का, गुण अच्छा है एक।
केवल करुणा भाव में, मात्र भावना नेक ॥

मन चंचल ज्यों चंचला, करुणा कसे लगाम।
करुणा की कीमत नहीं, मोल न एक छदाम ॥

करुणा मेरी कामना, करुणा करम सुरेश।
करुणा सब संसार में, विनती एक महेश ॥

— #सुरेशकविराय #सुरेशचंद्रा #दोहा

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