काव्य-सप्तक: बदलते दौर और समसामयिक चुनौतियाँ
1. तकनीकी बदलाव और संक्रमण काल
परिवर्तन के दौर में, छूटी कलम दवात।
तकनीकी विकसित हुई, चलना होगा साथ।।
2. लेखकों का ऐतिहासिक गौरव और अस्त्र
लेखे लेखक ने लिखे, वही बना इतिहास।
कागज कलम दवात ही, अस्त्र आपके खास।।
3. शोधपरक लेखन और सामाजिक प्रामाणिकता
शोध करे पाछे लिखै, लेखन नहि आसान।
दर्पण है संसार का, लेखन काम महान।।
4. बदलते गणतंत्र में शिक्षा की अनिवार्यता
बदल रहा सब तंत्र है, बदल रहा गण तंत्र।
शिक्षा ही वरदान है, नहीं काम के मंत्र।।
5. व्यावहारिक संकट और लाचार व्यवस्था
महँगाई की आजकल, बहुत बड़ी रफ़्तार।
राजतंत्र पन्गू हुआ, सत्ता है बीमार।।
6. शिक्षा का बाज़ारीकरण और युवा संघर्ष
अतिवादी सरकार ने, शिक्षा की बर्बाद।
छात्र सड़क पर आगये, पूँजीपति आवाद।।
7. एक लेखक का धर्म
सत्ता करती आज कल, तीखा तेज प्रहार।
लेखन अपना धर्म है, मानो मत ना हार।।
8. कवि की भणित और लोक-सत्य की घोषणा
नौटंकी सरकार की, चारों और कलेश।
सत्ता बेईमान है, सच्ची लिखी सुरेश।।
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