।। मुक्तक ।।
न ढलती शाम की सर्दी, न चढ़ती धूप की गर्मी,
सुहाना अब नहीं मौसम, हवाएं भी नहीं मर्मी।
बाहरें भी करें ज़ख़्मी, घटायें भी डरातीं हैं।,
जुदा जज्वात हर मुझसे, जुदा है मोम की नर्मी।।
चमकना है अगर तुमको तो जलना सीख लो।
चलोगे बाद में पहले तो गिरना सीख लो।
दिखेगा स्वर्ग भी पहले तो मरना सीख लो
महकना है अगर तुमको तो खिलना सीख लो।
#सुरेशकविराय #हिंदीछंद #मुक्तक
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