जाकौ मन चित शुध्द है, वही निभावे फ़र्ज़।
मात पिता के फ़र्ज़ कौ, संतित के सिर कर्ज़।।
संतित के सिर कर्ज़, चुकाये सो बढ़ भागी।
कर सेवा सत्कार, मुक्ति ऋण से मिल जागी।।
कहि सुरेश कविराय, काज न बिगरे बाकौ।
मानव वही महान, फ़र्ज़ निभतौ है जाकौ ।।
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