पुण्य वतन की आतमा, होता है साहित्य।
लेख धरोहर देश की, लेखन सुंदर कृत्य।।
शब्दकोश के शब्द मिल, बनते हैं साहित्य।
सकल शब्द जिंदे रहे, शब्द न होते मृत्य।।
देह मिटे माटी बने, अटल सत्य है शब्द।
शब्द हमेशा जीव के, लिखते रहते अब्द।।
शब्दकोश के शब्द सब, रहते हैं जीवंत।
शब्द कोश के शब्द का, कभी न होता अंत।।
तनाबाना शब्द का, बनता है साहित्य,
शब्दों की महिमा अमित, शब्द जगत का सत्य।।
सुरेश कविराय
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