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वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्, सुरेश कविराय द्वारा रचित गीत

शान हमारी प्रीय तिरंगा, भारत के सम्मान की,
बना हुआ पहचान तिरंगा,भारत के अभिमान की।
शीश झुकाकर करें वंदना, इस पावन वरदान की,
लिखी इबारत सुंदर इसने,भारत देश महान की।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।।

केसरिया रँग याद दिलाता, वीरों के बलिदान की,
याद दिलाता आज तिरंगा, अब्दुल वीर जवान की।
त्याग शौर्य की ऐ गाथा है, गाथा सूर्य समान की,
खुशीखुशी फ़ांसी को चूमा, गाथा वीर महान की।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।।

श्वेत रंग संदेश सुनाता, शांति और उजियारे का,
मिटा अंधेरा भारत माँ का,अंत हुआ अँधियारे का।
सत्य अहिंसा और प्रेम ही,जीवन पथ निरमान का,
चक्र अशोक प्रतीक बना है,नीति और विज्ञान का।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।।

हरा रंग खुशहाली का है,भोजन है हर थाली का,
प्रतीक बना है मातृभूमि का,धरती गौरवशाली का।
अमन चैन का रंग हरा है, रंग हरा अधिमान का,
अमन-चैन की गंगा बहती, गौरव हिंदुस्तान का।।
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।।
सुरेश कविराय

#सुरेशकविराय #हिंदी #गीत

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