अंधी बहरी हो गयी, भारत की सरकार।
लाठी सिर पर भाँजती, छीन रही अधिकार।।
छीन रही अधिकार, वतन में तानाशाही।
सुने नहीं सरकार, लठ्ठ से करे पिटाई।।
कहि सुरेश कविराय, तंत्र अब सारा बंदी।
घोर हुआ अन्याय, न्याय की देवी अंधी।।
लाठी लेकर हाथ में, कायर करें प्रहार।
होते बच्चे आपके, करते क्या स्वीकार।।
करते क्या स्वीकार, कि सहते वार निहत्थे।
हर वर्दी पर दाग, मगर तुम हट्टे कट्टे।।
कहि सुरेश कविराय, करेगी माफ न माटी।
सत्ता शीश सवार, मारते सिर पर लाठी।।
सुरेश कविराय
#सुरेशकविराय #हिंदी #छंद #कुण्डलियाँ
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें