नेता दुश्मन हो गए, लील गए ईमान।
सुनते जनता की नहीं, रोज करें अपमान।।
रोज करें अपमान, न लज्जा इनको आवै।
देकर सत्ता हाथ, कि जनता मूड़ खुजावै।।
कहि सुरेश कविराय, कि नेता केवल लेता।
पाजी बेईमान, नहीं कुछ देता नेता।।
सुरेश कविराय
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