अमर शहीद वहीद है, सारा वतन मुरीद।
फ़िदा हुआ जो देश पर, ऊँचा मान शहीद।।
मृत्यु एक शृंगार है, बोले अमर शहीद।
प्राण निछावर कर गया, अब्दुल वीर हमीद।।
मातृ भूमि की गोद में, सोए वीर अनेक।
नाम अमर इतिहास में, पावन लेख सुलेख।।
खुशबू अमर शहीद की, लेगा कौन ख़रीद।
महक महा अनमोल है, सुंदर सरस सईद।।
युग-युग तक जीवित रहे, कीर्तिमान की कीर्ति।
मगर शहीदी शौर्य है, एक ईश से प्रीति।।
मातृभूमि के वासते, शीश किये बलिदान।
अमर शहीदी पा गये, बांके वीर जवान।।
देख फिदाई वीर की, झुकते शीश प्रजेश।
अमर शहीदों को नमन, करता वतन सुरेश।।
मौलिक, स्वरचित
सुरेश कविराय
फ़िदा हुआ जो देश पर, ऊँचा मान शहीद।।
मृत्यु एक शृंगार है, बोले अमर शहीद।
प्राण निछावर कर गया, अब्दुल वीर हमीद।।
मातृ भूमि की गोद में, सोए वीर अनेक।
नाम अमर इतिहास में, पावन लेख सुलेख।।
खुशबू अमर शहीद की, लेगा कौन ख़रीद।
महक महा अनमोल है, सुंदर सरस सईद।।
युग-युग तक जीवित रहे, कीर्तिमान की कीर्ति।
मगर शहीदी शौर्य है, एक ईश से प्रीति।।
मातृभूमि के वासते, शीश किये बलिदान।
अमर शहीदी पा गये, बांके वीर जवान।।
देख फिदाई वीर की, झुकते शीश प्रजेश।
अमर शहीदों को नमन, करता वतन सुरेश।।
मौलिक, स्वरचित
सुरेश कविराय
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