भूमी के कारण हुए, बड़े भयंकर युद्ध।
कुरू पंडवा लड़ गए, होकर भी प्रबुद्ध।।
होकर भी प्रबुद्ध, युद्ध में उतरे राजा।
काटे शीश अनेक, वंश में खप्पर बाजा।।
लिखता बिलख सुरेश, विकल करती रणभूमी।
मृत्यू के उपरांत, कौन की कैसी भूमी।।
सुरेश कविराय
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