सड़कें अब आवाद हैं, संसद है वीरान।
सड़कों की आवाज सुन, सत्ता भी हैरान।।
सत्ता भी हैरान, जतन कर देखे सारे।
बढ़ता जाता रोष, कि अफसर हुए किनारे।।
कहि सुरेश कविराय, बीजुरी नभ से कड़के।
सत्ता है ख़ामोश, जोश में सारी सड़कें।।
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