हकमारू सरकार है, हकमारन की बान।
जनता सब कुछ जानती, नहीं रही अंजान।।
नहीं रही अंजान, कौन ज्ञानू के पीछे।
किया घोर अपमान, प्राण सत्ता ने खींचे।।
कर दीना मदहोश, बनी सत्ता ही दारू।
चोरी की सरकार, चोर होते हकमारू।।
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