बाज़ी सत्ता की लगी, सत्ता में मतभेद।
जनता सड़कों पर खड़ी, क्या सत्ता को खेद।
क्या सत्ता को खेद, करी भारी मनमानी।
तान दईं बंदूक, पुलिस ऐसी खिसियानी।।
कुर्सी खींचे लोग, मगर सत्ता है पाजी।
सत्ता का है खेल, लगी सत्ता की बाज़ी।।
#सुरेशकविराय #हिंदी ₹छंद #कुण्डलियाँ
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