सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
हारी सत्ता दमन कर, दमन किया पुरजोर।
जनता आई सामने, जनता कब कमजोर।
जनता कब कमजोर, शक्ति मिलकर दिखलाई।
चले न कोई चाल, सड़क पर जनता आई।
कहि सुरेश कविराय, सड़क पर मजमा भारी।
काँप गई सरकार, पुलिस सत्ता की हारी।।
सुरेशकविराय हिंदी छंद कुण्डलियाँ
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