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आज विषैली हो गई


 "राजनीतिक संवादों में जब मर्यादा और तर्क की जगह अंधभक्ति और हिंसा ले ले, तो समाज का ताना-बाना बिखरने लगता है। जहाँ रक्षक ही भक्षक बनकर आस्था और विश्वास को लूटने लगें, वहाँ न्याय की बुनियादी हवा भी ज़हरीली महसूस होने लगती है। आइए, इसी कड़वे सच से साक्षात्कार कराती यह रचना सुनें..."

आज विषैली हो गयी, राजनीति की बात, 

अंधभक्त हाबी हुये, चलते घूँसा लात। 

चलते घूँसा लात, झूँठ को साँच बताते, 

कहते चौकीदार, लूट मंदिर को खाते। 

कहि सुरेश कविराय, अनीती इनकी शैली, 

न्यायालय में गंध, फैलती आज विषैली।।


#कुंडलियाँ #हिंदीसाहित्य #सुरेशकविराय

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