सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
सुरेश 'कविराय' की मौलिक हिंदी रचनाएँ — कुण्डलियाँ, दोहे, गीत, ग़ज़ल, कविता, मुक्तक और साहित्यिक चिंतन।
पोथी रट पंडित बने, भीतर भरा कबाड़।
पाखंडों का देश में, ऊँचा खड़ा पहाड़।
ऊँचा खड़ा पहाड़, तर्क से ढोंगी डरता।
नफ़रत का बाज़ार, गरम पाखण्डी करता।।
कहि सुरेश कविराय, छोड़ सब बातें थोथी।
शिक्षा देती ज्ञान, छोड़ दे रटना पोथी।।
सुरेश कविराय
सत्य वचन, आजकल हर ओर पाखण्ड का ही बोलबाला है
जवाब देंहटाएंसादर आभार आपका आ.वैदेही
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