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मंज़िल का मिलना आसान नहीं।


 मंज़िल का मिलना नहीं, इतना भी आसान।

क्या-क्या छीने रास्ते, पथिक न करे बखान।।

पथिक न करे बखान, निकट जब मंज़िल आवे।

मन में खुशी अपार, नृत्य कर खुशी मनावे।।

कहि सुरेश कविराय, साथ केवल दे अंज़िल।

बीती बात बिसार, मिले आगे की मंज़िल।।

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