हिंदी का होता बहुत, भारत में गुणगान। हिंदी भाषा हिंद की, जगत बनी पहचान।। जगत बनी पहचान, बहुत मृदु हिंदी भाषा। शब्दों में संसार, हिंद की हिंदी आशा।। हिंदी के सर ताज, भाल पर सोहे बिंदी। छंद बंध अनुराग, बहुत प्यारी है हिंदी।। सुरेश चंद्रा
चूहा बिल्ली बोलते, बोला है ककरोच। घायल जनमन कर दिया, लगी सोच में मोच।। लगी सोच में मोच, नशा सत्ता का बोला। बिखर गया अभिमान, मोरचा ऐसा खोला।। कहि सुरेश कविराय, जेन जी तीखा पूहा। छिन्न भिन्न सब शान, चढ़े सिंहासन चूहा।।
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