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आतंकी तक कह दिया

 
आतंकी तक कह दिया, जो थे बच्चे नेक।
वाणी पर संयम नहीं, खोया सकल विवेक।।
खोया सकल विवेक, शर्म इनको नहि आती।
मुख मीठी मुस्कान, पीटकर कहते छाती।।
कहि सुरेश कविराय, बात जो करते मन की।
नहीं करें सम्मान, सुने ना ये जन मन की।।

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