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भारत की सरकार

अंधी बहरी हो गयी, भारत की सरकार। 

लाठी सिर पर भाँजती, छीन रही अधिकार।। 

छीन रही अधिकार, वतन में तानाशाही। 

सुने नहीं सरकार, लठ्ठ से करे पिटाई। 

कहि सुरेश कविराय, तंत्र अब सारा बंदी। 

घोर हुआ अन्याय, न्याय की देवी अंधी।। 

सुरेश कविराय

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