सिर फूटा लाठी चली, मचता हाहाकार।
बच्चे हक को डट गये, माँग रहे अधिकार।
माँग रहे अधिकार, खोट सत्ता के मन में।
खूनी है सरकार, छींट खूनी दामन में।
कहि सुरेश कविराय, देश सत्ता ने लूटा।
सत्ता सुने न एक, मांगते ही सिर फूटा।।
सुरेश कविराय
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