इस्तीफा देना पड़ा, गँवा दिया सम्मान।
किसी काम के थे नहीं, ठग निकले परधान।।
ठग निकले परधान, बड़े थे आप निकम्मे।
फिर भी शिक्षा नीति , करी इस ठग के जिम्मे।
कहि सुरेश कविराय, बने प्रधान खलीफा।।
मान रहे सुल्तान, चले निज दे इस्तीफा।।
सुरेश कविराय
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