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महगाई की मार

 बदहाली हाबी हुई, महगाई की मार। 

हाल बहुत खस्ता हुआ, रुपया है बीमार। 

रुपया है बीमार, करेगा कौन सगाई। 

राजनीति है ध्वस्त, बढ़ी अतिकी महगाई।। 

शिक्षा का भी नाश, नहीं कीनी रखबाली। 

किया देश का नाश, दिखे चहु दिश बदहाली।।

सुरेश कविराय

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