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दो बातों को छोड़ दो


 "आज के दौर का सबसे बड़ा सच यही है कि इंसान अपने दुखों से उतना परेशान नहीं है, जितना दूसरों के सुखों को देखकर उलझा हुआ है। जीवन का सरल विधान बस इतना ही है कि सुख-दुख के इस आने-जाने को एक समान भाव से स्वीकार कर लिया जाए, ताकि मन भीतर की परम शांति की ओर बढ़ सके। आइए, आत्ममंथन कराती इस दार्शनिक रचना को सुनें..."

दो बातों को छोड़ दो, समझो सरल विधान। 

सुख दूजा दुख आपना, दोनों एक समान।।

दोनों एक समान, लगा है आना जाना। 

सुख दूजे का देख, नहीं उलझन में आना। 

कहि सुरेश कविराय, परखना निज नातों को। 

बढ़ो शांति की ओर, छोड़ कर दो बातों को।।


#कुंडलियाँ #हिंदीसाहित्य #सुरेशकविराय

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