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लोकतंत्र की लाज


 घायल मानवता भयी, चोट करे सरकार। 

पुलिस कहर बरपा रही, दमन करे हर बार। 

दमन करे हर बार, लट्ठ से जमकर कूटे। 

मंत्री बेईमान, करें नित वादे झूंठे।

कहि सुरेश कविराय, किया बच्चों ने क़ायल। 

लोकतंत्र की लाज, रखी होकर के घायल।।

#कुंडलियाँ #हिंदीसाहित्य #सुरेशकविराय

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