लाठी लेकर हाथ में, कायर करें प्रहार।
होते बच्चे आपके, करते क्या स्वीकार।।
करते क्या स्वीकार, कि सहते वार निहत्थे।
हर वर्दी पर दाग, मगर तुम हट्टे कट्टे।।
कहि सुरेश कविराय, करेगी माफ न माटी।
सत्ता शीश सवार, मारते सिर पर लाठी।।
सुरेश कविराय
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