बदनामी से आजकल, डरें न बिल्कुल लोग।
रिश्ते नाजुक हो गए, लगा भयंकर रोग।।
लगा भयंकर रोग, सताते मात पिता को।
पूजा करने योग्य, भूलते उसी प्रथा को।।
कहि सुरेश कविराय, लोभ बस भरें न हामी।
मात पिता की त्रास, बड़ी भारी बदनामी।।
बदनामी से आजकल, डरें न बिल्कुल लोग।
रिश्ते नाजुक हो गए, लगा भयंकर रोग।।
लगा भयंकर रोग, सताते मात पिता को।
पूजा करने योग्य, भूलते उसी प्रथा को।।
कहि सुरेश कविराय, लोभ बस भरें न हामी।
मात पिता की त्रास, बड़ी भारी बदनामी।।
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