हरियाली की हरितिमा, पावस ऋतु की देन।
भूमि सकल हर्षित हुई, मिले नैन से नैन।।
मिले नैन से नैन, उतर भू बादल आये।
करें भूमि को तृप्त, जलद जल मृदु बरसाये।।
कहि सुरेश कविराय, घटा है नभ में काली।
छटा करे अभिभूत, बहुत सुंदर हरियाली।।
हरियाली की हरितिमा, पावस ऋतु की देन।
भूमि सकल हर्षित हुई, मिले नैन से नैन।।
मिले नैन से नैन, उतर भू बादल आये।
करें भूमि को तृप्त, जलद जल मृदु बरसाये।।
कहि सुरेश कविराय, घटा है नभ में काली।
छटा करे अभिभूत, बहुत सुंदर हरियाली।।
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