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 हरियाली की हरितिमा, पावस ऋतु की देन।

भूमि सकल हर्षित हुई, मिले नैन से नैन।।

मिले नैन से नैन, उतर भू बादल आये।

करें भूमि को तृप्त, जलद जल मृदु बरसाये।।

कहि सुरेश कविराय, घटा है नभ में काली।

छटा करे अभिभूत, बहुत सुंदर हरियाली।।

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हिंदी का होता बहुत, भारत में गुणगान। हिंदी भाषा हिंद की, जगत बनी पहचान।। जगत बनी पहचान, बहुत मृदु हिंदी भाषा। शब्दों में संसार, हिंद की हिंदी आशा।। हिंदी के सर ताज, भाल पर सोहे बिंदी। छंद बंध अनुराग, बहुत प्यारी है हिंदी।। सुरेश चंद्रा

आतंकी तक कह दिया

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आज विषैली हो गई

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