जल से मैं बादल बना, मै तज दी तो नीर।
मै मेरा परताप थी, मृदु जल कीना क्षीर।।
मृदु जल कीना क्षीर, क्षीर को नीर बनाया।
विरह वेदना देख, मेघ अस्तित्व मिटाया।
कहि सुरेश कविराय, प्रेम न होता बल से।
धरती का अस्तित्व, बना है मिलकर जल से।।
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