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सार सब भूला प्राणी।


प्राणी ही संसार में, पैदा करे विकार। 

सार नहीं संसार में, करे समय बेकार।। 

करे समय बेकार, मोह माया का फंदा। 

दिखे न रब का रूप, नैन होते भी अंधा।। 

कहि सुरेश कविराय, न बोले मीठी वाणी। 

मद ममता में चूर, सार सब भूला प्राणी।

सुरेश कविराय

 

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